सूखे वृक्ष को जीवन देने वाला चमत्कार: कैंची धाम के पावन उत्तीस वृक्ष की अद्भुत कथा
June 07, 2026
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पौराणिक कथाएं
नैनीताल: सूखे वृक्ष को जीवन देने वाला चमत्कार: कैंची धाम के पावन उत्तीस वृक्ष की अद्भुत कथा
कैंची धाम में एक ऐसा पावन वृक्ष श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है, जिसकी कहानी नीम करोली बाबा महाराज जी के चमत्कारों की जीवंत गाथा सुनाती है। स्वर्गीय पूर्णानन्द तिवारी के पुत्र उर्वा दत्त तिवारी (उमेश दा) द्वारा एक मुलाक़ात में बताया कि यह घटना उनके पिता स्वर्गीय पूर्णानंद तिवारी द्वारा स्वयं सुनाई गयी थी।
लगभग वर्ष 1965-66 के मध्य की बात है। महाराज जी अक्सर कैंची धाम मंदिर के पीछे स्थित एक सूखे उत्तीस के पेड़ के नीचे रखी बड़ी शिला पर बैठा करते थे। उनके चारों ओर भक्तगण बैठकर सत्संग का आनंद लेते थे। उस समय स्वर्गीय पूर्णानन्द तिवारी बाबा की सेवा में सदैव उनके समीप उपस्थित रहते थे।
एक दिन पूर्णानन्द तिवारी ( उर्वा दत्त तिवारी के पिता ) ने बाबा से निवेदन किया कि वे उस सूखे पेड़ के नीचे बैठना छोड़ दें। उन्होंने कहा कि पेड़ पूरी तरह सूख चुका है और यदि उसकी कोई शाखा टूटकर गिर गई तो किसी भक्त को नुकसान पहुंच सकता है। इस पर बाबा मुस्कराए और बोले, “पूर्णानन्द, क्या यह पेड़ फिर से हरा नहीं हो सकता?”
पूर्णानन्द तिवारी ने उत्तर दिया, “महाराज, यह पेड़ अपनी आयु पूरी कर चुका है, अब यह कैसे हरा हो सकता है?”
तब बाबा ने कहा, “यदि तू मेरा एक काम करेगा तो यह पेड़ फिर से हरा हो जाएगा।”
बाबा के आदेश पर पूर्णानन्द तिवारी घर से कुदाल लाए और पेड़ के चारों ओर पानी रोकने के लिए क्यारी बनाई। 
बाबा ने उन्हें निर्देश दिया कि वे प्रतिदिन गंगामाई (नदी) से पानी लाकर इस पेड़ में डालें। यद्यपि पूर्णानन्द तिवारी को विश्वास नहीं था कि सूखा पेड़ फिर से जीवित हो सकता है, फिर भी उन्होंने गुरु आज्ञा को सर्वोपरि मानते हुए लगातार 15 दिनों तक प्रतिदिन पानी डाला।
कहा जाता है कि 16
दिन उस सूखे वृक्ष में नई कोपलें फूटने लगीं। धीरे-धीरे पूरा वृक्ष हरा-भरा हो गया। यह दृश्य वहां उपस्थित लोगों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। इसके बाद यह वृक्ष वर्षों तक हरा-भरा खड़ा रहा और श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक बन गया।
समय का चक्र चलता रहा और यह पावन वृक्ष लगभग छह दशकों तक अपनी हरियाली के साथ कैंची धाम की इस अद्भुत कथा का साक्षी बना रहा। किंतु 14 मई 2026 को मंदिर की सायं आरती के बाद बिना किसी आंधी, तूफान या वर्षा के यह विशाल वृक्ष अचानक तीन बार हवा में घूमता हुआ धरती पर गिर पड़ा। इस घटना ने उपस्थित श्रद्धालुओं को आश्चर्यचकित कर दिया।
आज भी उस वृक्ष की एक छोटी शाखा श्रद्धा और स्मृति के रूप में सुरक्षित है, जो महाराज जी की कृपा, गुरु-भक्ति और अटूट विश्वास की इस अलौकिक कथा की साक्षी मानी जाती है।
जानकारी:
उर्वा दत्त तिवारी (उमेश दा)
पुत्र: स्वर्गीय पूर्णानन्द तिवारी
कैंची धाम, नैनीताल (उत्तराखण्ड)


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