राज्यपाल ने किया नैनीताल की विरासत पर आधारित पुस्तक का विमोचन
June 25, 2026
•
80 views
विचार
नैनीताल: ‘अतीत से वर्तमान तक’ पुस्तक को बताया ऐतिहासिक धरोहरों का महत्वपूर्ण दस्तावेज, विश्वविद्यालयों तक पहुंचाने की घोषणा
नैनीताल। उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने कहा कि नैनीताल स्थित राजभवन केवल राज्यपाल का ग्रीष्मकालीन आवास नहीं, बल्कि इतिहास, वास्तुकला और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि विरासत और नवाचार का समन्वय ही विकसित भारत की आधारशिला है तथा ऐतिहासिक धरोहरों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
बुधवार को राजभवन में वरिष्ठ पत्रकार एवं शिक्षाविद् डॉ. गिरीश रंजन तिवारी द्वारा लिखित पुस्तक “अतीत से वर्तमान तक : नैनीताल का सफर और गॉथिक राजभवन के निर्माण की अद्भुत गाथा” का विमोचन किया गया। इस अवसर पर सिद्धार्थ माधव द्वारा विकसित एआई हेरिटेज एंड टूरिज्म एप का भी लोकार्पण किया गया।
राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के ‘विकास भी, विरासत भी’ मंत्र को साकार करने के लिए सांस्कृतिक संरक्षण और तकनीकी नवाचार दोनों को समान महत्व देना होगा। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक और एआई एप उत्तराखंड की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
उन्होंने पुस्तक को नैनीताल और उत्तराखंड की ऐतिहासिक धरोहर को समझने के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज बताते हुए कहा कि यह केवल इतिहास का संकलन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य विरासत है। गहन शोध और प्रमाणिक तथ्यों पर आधारित यह कृति इतिहास प्रेमियों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी।
डॉ. गिरीश रंजन तिवारी ने बताया कि राज्यपाल के सुझाव पर उन्होंने नैनीताल, इसकी ऐतिहासिक धरोहरों और विशेष रूप से राजभवन के इतिहास पर विस्तृत शोध कर यह पुस्तक तैयार की है। समारोह में राज्यपाल ने लेखक और एप डेवलपर सिद्धार्थ माधव को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित भी किया।
राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि पुस्तक की पहली प्रति राष्ट्रपति को भेंट की जा चुकी है और अब इसकी प्रतियां प्रधानमंत्री, सभी राज्यों के राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों तथा केंद्रीय मंत्रियों को भी भेजी जाएंगी। 
उन्होंने यह भी घोषणा की कि पुस्तक को उत्तराखंड के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाएंगे।
इस अवसर पर राजभवन की वित्त नियंत्रक डॉ. तृप्ति श्रीवास्तव, संयुक्त निदेशक सूचना डॉ. नितिन उपाध्याय, प्रकाशक संतोष सिंह, डीके शर्मा, प्रो. नीरजा टंडन, प्रो. महेंद्र राणा, प्रो. ललित तिवारी, होटल एसोसिएशन अध्यक्ष दिग्विजय सिंह बिष्ट, कूर्मांचल बैंक अध्यक्ष विनय साह सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग, शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
राज्यपाल के गांव के कारीगरों ने किया था राजभवन का निर्माण
पुस्तक के लेखक डॉ. तिवारी ने बताया कि उनके शोध में यह तथ्य सामने आया कि राजभवन के निर्माण में पंजाब के रामगढ़िया सिख कारीगरों का महत्वपूर्ण योगदान था, जो राज्यपाल के पैतृक गांव से जुड़े थे। उन्होंने कहा कि भवन का डिजाइन ब्रिटिश वास्तुकारों ने तैयार किया था, लेकिन निर्माण कार्य भारतीय मजदूरों और स्थानीय शिल्पकारों ने किया।
तकनीक बनेगी विरासत संरक्षण का सशक्त माध्यम
राज्यपाल ने एआई हेरिटेज एंड टूरिज्म एप की सराहना करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में तकनीक केवल सुविधा का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, इतिहास और समाज के संरक्षण का भी प्रभावी साधन बन सकती है। एप में हेरिटेज गाइड, स्मार्ट ट्रिप प्लानर, इंटरएक्टिव टाइम कैप्सूल और हिडन जेम्स जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जो पर्यटकों और शोधार्थियों को नई जानकारी प्रदान करेंगी।
उन्होंने कहा कि पुस्तक अतीत से जोड़ती है, जबकि एआई एप भविष्य की दिशा दिखाता है। दोनों मिलकर ऐसे भारत की तस्वीर प्रस्तुत करते हैं जो अपनी विरासत पर गर्व करता है और नवाचार के साथ आगे बढ़ता है।


Comments
0 voicesLog in or sign up to comment
No comments yet. Be the first to share your thoughts!