नैनीताल विधानसभा में कांग्रेस की दावेदारी हुई रोचक, वरिष्ठ नेताओं और युवा चेहरों की भी मजबूत दस्तक
July 04, 2026
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राजनीति
नैनीताल: उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर नैनीताल विधानसभा सीट पर कांग्रेस में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। पार्टी के भीतर टिकट को लेकर कई वरिष्ठ और युवा नेताओं के नाम चर्चा में हैं। इस बार दावेदारों की लंबी सूची ने नैनीताल विधानसभा की राजनीति को और दिलचस्प बना दिया है।
कांग्रेस के संभावित दावेदारों में पूर्व विधायक संजीव आर्य, वरिष्ठ कांग्रेस नेता हेम आर्य, पूर्व पालिकाध्यक्ष सरोज आर्य, वरिष्ठ नेता मनोज साह, युवा कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव मीमांसा आर्य, जिला पंचायत सदस्य जिशांत कुमार (सिंकू), दीपक कुमार भोलू तथा वरिष्ठ कांग्रेस नेता संजय कुमार ‘संजू’ के नाम प्रमुख रूप से सामने आ रहे हैं।
युवा नेतृत्व की बात करें तो भारतीय युवा कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव एवं हरियाणा युवा कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी मीमांसा आर्य ने छात्र राजनीति से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने एमबीपीजी कॉलेज हल्द्वानी में छात्रसंघ अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने वाली पहली महिला उम्मीदवार के रूप में इतिहास रचा था। वहीं, भारत जोड़ो यात्रा, पेपर लीक आंदोलन और युवाओं के मुद्दों पर उनकी सक्रियता ने उन्हें कांग्रेस के उभरते युवा चेहरों में शामिल किया है।
दूसरी ओर, जिला पंचायत सदस्य जिशांत कुमार (सिंकू) भी क्षेत्र में अपनी सक्रियता और जनसंपर्क अभियान के चलते संभावित दावेदारों की सूची में शामिल बताए जा रहे हैं। इसके अलावा दीपक कुमार भोलू का नाम भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
वरिष्ठ नेताओं में संजय कुमार ‘संजू’ का राजनीतिक अनुभव और पारिवारिक राजनीतिक विरासत उन्हें मजबूत दावेदारों की श्रेणी में खड़ा करती है। 
संजय कुमार ने वर्ष 1984-85 और 1987 में छात्र राजनीति में संयुक्त सचिव और उपाध्यक्ष के रूप में कार्य किया। वर्ष 1988 में वे नगर पालिका सदस्य निर्वाचित हुए तथा 1997 से 2002 तक निर्दलीय चेयरमैन रहे। वर्तमान में वे उत्तराखंड स्थानीय अध्यक्ष महासंघ के कार्यकारी अध्यक्ष हैं।
संजय कुमार का परिवार लंबे समय से राजनीति से जुड़ा रहा है। उनके दादा कुमाऊं केसरी खुशीराम वर्ष 1946 से 1967 तक विधायक रहे, जबकि उनके ताऊ इंदर लाल वर्ष 1967 से 1977 तक विधायक रहे। उनके पिता कृष्ण चंद्र, जो पेशे से अधिवक्ता थे, वर्ष 1971 से 1977 तक पालिकाध्यक्ष रहे और 1977 से 1980 के बीच नगर कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर भी रहे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस यदि आगामी विधानसभा चुनाव में अनुभव और युवा नेतृत्व के बीच संतुलन बनाने की रणनीति अपनाती है, तो नैनीताल विधानसभा सीट पर टिकट की दौड़ अंतिम समय तक बेहद दिलचस्प बनी रह सकती है। हालांकि, पार्टी नेतृत्व की ओर से अभी तक किसी भी नाम पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन नैनीताल विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस की दावेदारी ने राजनीतिक हलकों में चर्चा जरूर तेज कर दी है।


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