16 जुलाई को मनाया जाएगा हरेला पर्व, जानिए कब और कैसे बोया जाएगा हरेला
July 04, 2026
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धर्म
नैनीताल: नैनीताल। देवभूमि उत्तराखंड के कुमाऊं अंचल का लोकपर्व हरेला इस वर्ष 16 जुलाई 2026 को मनाया जाएगा। प्रकृति, कृषि और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाला यह पर्व कुमाऊं की सांस्कृतिक पहचान माना जाता है। परंपरा के अनुसार श्रावण मास के प्रथम दिन यानी कर्क संक्रांति पर हरेला काटकर पूजा-अर्चना की जाती है।
ज्योतिषाचार्य पंडित प्रकाश जोशी, गेठिया के अनुसार जो परिवार दसवें दिन हरेला काटते हैं, वे 7 जुलाई को हरेला बोएंगे, जबकि 11वें दिन हरेला काटने वाले परिवार 6 जुलाई को हरेला बोएंगे। वहीं, नौवें दिन हरेला काटने की परंपरा निभाने वाले लोग 8 जुलाई को हरेला बो सकते हैं।
सात या पांच प्रकार के अनाज से बोया जाता है हरेला
हरेला बोने के लिए शुद्ध स्थान की मिट्टी को सुखाकर छान लिया जाता है। इसके बाद धान, गेहूं, मक्का, भट्ट, उड़द, गहत और तिल जैसे पांच या सात प्रकार के अनाजों का मिश्रण तैयार कर उसे मालू या तिमले के पत्तों से बने दौन या ‘खोपी’ में बोया जाता है। इसे घर के देवस्थान में सूर्य की सीधी रोशनी से बचाकर रखा जाता है। दो से तीन दिनों में इसमें अंकुरण शुरू हो जाता है।
प्लास्टिक के बर्तनों से करें परहेज
पंडित प्रकाश जोशी ने बताया कि हरेला प्रकृति संरक्षण का पर्व है, इसलिए इसे बोने के लिए प्लास्टिक के बर्तनों का उपयोग नहीं करना चाहिए।
पारंपरिक रूप से मालू और तिमले के पत्तों से बने दौन या खोपी का ही प्रयोग शुभ माना जाता है और इससे पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है।
हरेला बोते समय रखें इन बातों का ध्यान
हरेला बोने के लिए उपयोग किए जाने वाले बीज सड़े हुए नहीं होने चाहिए। हरेले को उजाले से बचाकर रखा जाता है और प्रतिदिन संतुलित मात्रा में सिंचाई की जाती है, ताकि मिट्टी न बहे और फसल खराब न हो। हरेला काटने से एक दिन पहले उसकी गुड़ाई-निराई कर रक्षासूत्र बांधा जाता है तथा गंध-अक्षत चढ़ाकर पूजा की जाती है।
कुमाऊं के कई क्षेत्रों में आज भी हरेले के अवसर पर भगवान शिव, पार्वती, गणेश और कार्तिकेय के डिकरे बनाकर उनकी पूजा की जाती है। हरेले के दिन विशेष पकवान, पूड़ी और उड़द के बड़े बनाए जाते हैं तथा प्रकृति संरक्षण का संकल्प लेते हुए पौधरोपण भी किया जाता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित प्रकाश जोशी ने लोगों से हरेला पर्व को पारंपरिक स्वरूप में मनाने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाने की अपील की है।

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