नैनीताल: नैनी महिला एवं बाल विकास समिति ने किया ऐपण/रंगोली प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन
December 27, 2024
•
521 views
सामान्य
उत्तराखंड: ऐपण/रंगोली प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन
जीविका अवसर प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत पारंपरिक कला संरक्षण का प्रयास
नैनी महिला एवं बाल विकास समिति, सूखाताल द्वारा बहुउद्देशीय वित्त एवं विकास निगम के सहयोग से ऐपण/रंगोली प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन ऐशडेल कन्या इंटर कॉलेज, सूखाताल में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था की पूर्व सदस्याओं—श्रीमती अनीता सिंह, श्रीमती मोहनी बिष्ट, और श्रीमती चंपा देवी—द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।
ऐपण कला का महत्व और प्रशिक्षण की विधियां
श्रीमती अनीता सिंह ने ऐपण की पारंपरिक विधियों और इसके सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पहले ऐपण गेरू और चावल के मिश्रण से बनाए जाते थे, लेकिन आधुनिक समय में इसे पेंट्स और अन्य सामग्रियों से तैयार किया जा रहा है। यह कला उत्तराखंड की परंपरा और लोक संस्कृति की महत्वपूर्ण पहचान है।
श्रीमती चंपा देवी ने कुमाऊं की रीति-रिवाजों, संस्कारों और लोक विधाओं की जानकारी दी। प्रशिक्षिकाओं—कु. रजनी और कु. गीता—ने प्रशिक्षार्थियों को लक्ष्मी चौकी, सरस्वती चौकी, शिव शक्ति चौकी, आचार्य चौकी और नामकरण चौकी जैसे ऐपण डिज़ाइनों के साथ देवी-देवताओं और प्रकृति से प्रेरित चित्र बनाने की विधियां सिखाईं।
प्रेरणादायक संवाद और तकनीकी जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि ऐपण बनाते समय तर्जनी, अनामिका और मध्यमा अंगुलियों का उपयोग किया जाता है। श्रीमती अनीता सिंह ने प्रतिभागियों को प्रेरित करते हुए कहा कि यह कला हमारी पारंपरिक लोक संस्कृति की धरोहर है, जिसे मन लगाकर सीखना चाहिए।
प्रतिभागियों की भागीदारी
कार्यक्रम में अंजली, गंगा, तनुजा, गीता, रेनू, पायल, प्रीति, कंचन, नेहा, आशा, आरती, खुशी, ईशा, सुमन, सुनीता, करिश्मा, प्रिया, आरती, गरिमा और अनीता सहित कुल 20 प्रशिक्षार्थियों ने हिस्सा लिया।
निष्कर्ष
यह कार्यक्रम पारंपरिक ऐपण कला को संरक्षित करने के साथ-साथ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके लिए जीविका के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
Comments
0 voicesLog in or sign up to comment
No comments yet. Be the first to share your thoughts!