श्री राम सेवक सभा के धार्मिक आयोजन, 23 जनवरी को उपनयन संस्कार
January 07, 2026
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धर्म
नैनीताल: नैनीताल की प्राचीनतम धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था श्री राम सेवक सभा (स्थापना वर्ष 1918) विगत कई दशकों से नगर में धार्मिक व सामाजिक दायित्वों का निरंतर निर्वहन करती आ रही है। इसी क्रम में वर्ष 2026 में सभा द्वारा मकर संक्रांति के अवसर पर खिचड़ी भोज तथा दिनांक 23 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी के पावन पर्व पर सामूहिक उपनयन (यज्ञोपवीत) संस्कार का भव्य आयोजन किया जाएगा।
इस संबंध में आयोजित बैठक के बाद जानकारी देते हुए सभा के अध्यक्ष मनोज साह एवं महासचिव जगदीश बावरी ने बताया कि जो भी अभिभावक अपने बच्चों का उपनयन संस्कार कराना चाहते हैं, उनके लिए पूर्व पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। पंजीकरण की प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ की जाएगी, ताकि विधि-विधान से सभी धार्मिक अनुष्ठानों की समुचित व्यवस्था की जा सके।
उन्होंने बताया कि यज्ञोपवीत संस्कार, जिसे उपनयन संस्कार भी कहा जाता है, हिंदू धर्म के सोलह संस्कारों में एक अत्यंत महत्वपूर्ण संस्कार है, जो बालक को औपचारिक रूप से शिक्षा एवं आध्यात्मिक जीवन में प्रवेश दिलाने का प्रतीक माना जाता है। इस संस्कार के अंतर्गत बालक को यज्ञोपवीत (जनेऊ) धारण कराया जाता है और उसे ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करते हुए वेदाध्ययन और सदाचार के मार्ग पर चलने की दीक्षा दी जाती है। इस अवसर पर बालक को “द्विज” अर्थात दो बार जन्मा हुआ माना जाता है—एक भौतिक जन्म माता-पिता से और दूसरा आध्यात्मिक जन्म गुरु एवं ज्ञान के माध्यम से।
यज्ञोपवीत के तीन धागे ऋषि ऋण, देव ऋण और पितृ ऋण के प्रतीक होते हैं, जो व्यक्ति को जीवन भर अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने की प्रेरणा देते हैं। साथ ही इसके नौ गुण जैसे तप, सत्य, संयम, ब्रह्मचर्य, सेवा और अनुशासन जैसे आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प भी इस संस्कार के माध्यम से दिलाया जाता है। यह संस्कार व्यक्ति को पशुता त्यागकर मनुष्यत्व और सदाचार की ओर अग्रसर होने का संदेश देता है।
सभा पदाधिकारियों ने बताया कि उपनयन संस्कार के दौरान मुंडन, चंदन लेप, हवन, गायत्री मंत्र का जाप, गुरु मंत्र दीक्षा एवं भिक्षाटन जैसे सभी वैदिक अनुष्ठान विधिवत रूप से संपन्न कराए जाएंगे। श्री राम सेवक सभा द्वारा यह सामाजिक-धार्मिक कार्य पिछले एक दशक से लगातार सामूहिक रूप से कराया जा रहा है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के परिवारों को भी अपने बच्चों के संस्कार कराने का अवसर प्राप्त हो रहा है।
उन्होंने बताया कि बसंत पंचमी को विद्या की देवी मां सरस्वती की आराधना का पर्व माना जाता है तथा इसे ‘अबूझ मुहूर्त’ कहा जाता है, जिस दिन बिना पंचांग देखे भी शुभ कार्य संपन्न किए जा सकते हैं। इसी कारण इस दिन अक्षरारंभ, मुंडन एवं विशेष रूप से उपनयन संस्कार कराना अत्यंत शुभ माना जाता है और परंपरागत रूप से इसी दिन बच्चों को वेदों के अध्ययन एवं गुरु-शिष्य परंपरा में प्रवेश कराया जाता है।
सभा ने नगरवासियों से अपील की है कि अधिक से अधिक लोग इस सामाजिक-धार्मिक आयोजन में सहभागिता करें तथा जिन अभिभावकों को अपने बच्चों का उपनयन संस्कार कराना है, वे समय रहते पंजीकरण कराकर आयोजन को सफल बनाएं।
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