जलवायु परिवर्तन का प्रभाव: नैनीताल में समय से पूर्व पककर मंडी में पहुंचे काफल ,400 रूपए किलो बिका

by Ganesh_Kandpal

March 19, 2025, 12:20 p.m. [ 268 | 0 | 0 ]
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जलवायु परिवर्तन का प्रभाव: नैनीताल में समय से पूर्व पककर मंडी में पहुंचे काफल

नैनीताल। जलवायु परिवर्तन के असर के चलते इस बार नैनीताल और आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों में काफल का फल अपने सामान्य समय से पहले ही पकने लगा है। आमतौर पर काफल का मौसम अप्रैल-मई में रहता है, लेकिन इस वर्ष मार्च के मध्य में ही काफल बाजार में पहुंच गया है।

मंडी में सीजन का पहला काफल पहुंचा

मंगलवार को नैनीताल के मल्लीताल स्थित मंडी में सीजन का पहला काफल पहुंचने पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सौड़ बग्गड़ क्षेत्र के एक ग्रामीण ने चार किलो काफल मंडी में लाकर बेचा। मंडी में कार्यरत व्यवसायी वैभव साह ने बताया कि यह सीजन का पहला काफल था, जिसे लेकर आए ग्रामीण ने इसे 400 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा।

सीजन का पहला काफल होने के कारण इसे देखने और खरीदने के लिए मंडी में लोगों की उत्सुकता साफ झलक रही थी। लोग न केवल इसकी गुणवत्ता को परखने में रुचि दिखा रहे थे, बल्कि कुछ लोगों ने काफल के समय से पूर्व पकने पर चिंता भी व्यक्त की।

जलवायु परिवर्तन का प्रभाव

स्थानीय कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, नैनीताल और उसके आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम के मिजाज में आ रहे बदलाव के कारण काफल का सीजन प्रभावित हुआ है। आमतौर पर काफल अप्रैल-मई में पकता है, लेकिन इस बार मौसम में तेजी से हो रहे परिवर्तन के चलते यह मार्च के मध्य में ही तैयार हो गया।

विशेषज्ञ बताते हैं कि इस बार क्षेत्र में ठंड का असर अपेक्षाकृत कम रहा और फरवरी-मार्च के महीनों में तापमान में असामान्य वृद्धि देखी गई। इसके चलते काफल के पकने की प्रक्रिया तेजी से पूरी हो गई।

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस वर्ष काफल का पकना न केवल जल्दी शुरू हुआ है, बल्कि इसकी मात्रा भी सामान्य से कम हो सकती है। उन्होंने आशंका जताई है कि जलवायु परिवर्तन के चलते इस तरह की घटनाएं भविष्य में और अधिक हो सकती हैं, जिससे स्थानीय कृषि उत्पादों पर असर पड़ सकता है।

क्या है काफल का महत्व?

काफल उत्तराखंड और हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाने वाला एक स्वादिष्ट और लोकप्रिय फल है। यह केवल सीमित समय के लिए उपलब्ध रहता है और इसकी मिठास और रसीले स्वाद के कारण लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं। पारंपरिक रूप से काफल को स्वास्थ्यवर्धक भी माना जाता है, जिससे इसकी मांग हमेशा बनी रहती है।

निष्कर्ष

नैनीताल की मंडी में पहुंचे इस पहले काफल ने जहां लोगों के चेहरों पर खुशी ला दी, वहीं समय से पहले इसके पकने को लेकर चिंता भी जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव इसी तरह बना रहा, तो आने वाले वर्षों में स्थानीय फसलों और फलों के उत्पादन में बड़ी चुनौतियां सामने आ सकती हैं।


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