by Ganesh_Kandpal
March 7, 2025, 2:49 p.m.
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उत्तराखंडी लोक भाषा में समानार्थी शब्दों के प्रयोग एवं समरूप साहित्य पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित
हिन्दी एवं अन्य भारतीय भाषा विभाग, कुमाऊँ विश्वविद्यालय नैनीताल, यूकॉस्ट और उत्तराखण्डी भाषा न्यास (उभान) के संयुक्त तत्वावधान में 7-8 मार्च 2025 को द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन कुमाऊं विश्वविद्यालय के बुरांश सभागार में हुआ। कार्यशाला का विषय “उत्तराखंडी लोक भाषा में समानार्थी शब्दों का प्रयोग एवं समरूप साहित्य का निर्माण” था।
कार्यशाला का उद्घाटन और अतिथि वक्तव्य
कार्यशाला के प्रथम सत्र का उद्घाटन श्री दीपक रावत (आयुक्त, कुमाऊं मंडल) एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता श्री दीपक रावत ने की, जबकि प्रो. दुर्गेश पंत (डी.जी. यूकॉस्ट) ऑनलाइन माध्यम से जुड़े।
मुख्य अतिथियों में डॉ. बिहारी लाल जलंधरी (सचिव, उभान) विषय प्रवर्तक रहे, जबकि श्री नीलांबर पांडे (अध्यक्ष, उभान) मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे। मंच संचालन डॉ. कपिल कुमार ने किया, और सभी अतिथियों का स्वागत प्रो. निर्मला ढैला बोरा (अध्यक्ष, हिन्दी विभाग) ने किया।
उत्तराखंडी लोक भाषाओं के संरक्षण पर विचार-विमर्श
विषय प्रवर्तक डॉ. बिहारी लाल जलंधरी ने कुमाउनी और गढ़वाली की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए देशभर की भाषाओं की समरूप शब्दावली पर ध्यान आकर्षित किया। मुख्य वक्ता श्री नीलांबर पाण्डेय ने उत्तराखंडी लोक भाषाओं का आधार संस्कृत को बताया और इनकी वर्तमान शब्दावली के संरक्षण व समरूपता पर कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया।
मंडल आयुक्त श्री दीपक रावत ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उत्तराखंड के गांवों के नामों से जुड़ी स्थानीय भाषाओं की विशेषता बताते हुए यह सुझाव दिया कि उत्तराखंडी बोलियों के शब्दों को अंग्रेजी समाचार पत्रों की भांति स्थानीय समाचार पत्रों में स्थान मिलना चाहिए।
कार्यशाला में विद्वानों एवं शोधार्थियों की सहभागिता
इस कार्यशाला में अनेक विद्वानों, शोधार्थियों और भाषा विशेषज्ञों ने भाग लिया। प्रमुख रूप से उपस्थित विद्वान थे:
• प्रो. चन्द्रकला रावत, डॉ. शुभा मटियानी, डॉ. शशि पाण्डे, मेधा नैलवाल, डॉ. कंचन आर्या, डॉ. दीक्षा मेहरा, प्रो. सावित्री कैड़ा जन्तवाल, प्रो. ज्योति जोशी, प्रो. चित्रा पाण्डेय, प्रो. एम. एस. मावड़ी, डॉ. नन्दन सिंह बिष्ट, प्रो. गीता तिवारी, डॉ. सुची बिष्ट, डॉ. रूमा शाह, डॉ. प्रभा साह, डॉ. संध्या गड़कोटी, नीता शाह, डॉ. पृथ्वी सिंह केदारखंडी, सुल्तान सिंह तोमर, डॉ. हरि सुमन बिष्ट, डॉ. निर्मला जोशी, डॉ. मीना राणा, डॉ. विवेकानंद पाठक, डॉ. भावना जोशी, डॉ. गजेन्द्र सिंह, डॉ. बी. एस. कालाकोटी, डॉ. हयात सिंह रावत।
इसके अलावा शोधार्थी ललित मोहन, सृष्टि गंगवार, शिवानी शर्मा, हिमांशु विश्वकर्मा, भगवती बिष्ट, पूजा, धीरज, देवेंद्र आदि भी इस कार्यशाला में उपस्थित रहे।
कार्यशाला का समापन कूटा अध्यक्ष प्रो. ललित तिवारी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस महत्वपूर्ण आयोजन से उत्तराखंडी लोक भाषाओं के संरक्षण और समरूपता को लेकर नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
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