by Ganesh_Kandpal
Dec. 16, 2024, 3:16 p.m.
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भवन निर्माण में सुधार की नई पहल: ARCED ने प्रशासन से की व्यवहारिक बदलावों की मांग
नैनीताल के लोहरियासाल मल्ला स्थित एसोसिएशन ऑफ रजिस्टर्ड सिविल इंजीनियर्स एंड रेटमैन (ARCED) ने भवन निर्माण एवं विकास उपविधि-2011 (संसोधन 2019) में आ रही व्यवहारिक कठिनाइयों और समस्याओं का समाधान करने की मांग की है। संगठन के अध्यक्ष बी.सी. काण्डपाल ने इस विषय में जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण, नैनीताल को एक ज्ञापन सौंपा।
भवन निर्माण नियमों की व्यवहारिकता पर सवाल
ARCED का कहना है कि उत्तराखंड में समय-समय पर भवन निर्माण नियमों में संशोधन किए जाते रहे हैं, लेकिन इनमें कुछ ऐसे प्रावधान शामिल हैं, जो व्यवहारिक नहीं हैं। संगठन ने जोर देकर कहा कि यदि नियमों को वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ा जाए, तो उनका पालन भी बेहतर तरीके से हो सकेगा।
महत्वपूर्ण समस्याएं और समाधान के सुझाव
1. शासनादेशों का अनुपालन न होना
सरकार द्वारा जारी आदेशों, जैसे 7 जनवरी 2022 और 20 नवंबर 2023 के दिशा-निर्देशों का सही अनुपालन नहीं हो रहा है। इनमें एकल आवासीय प्रकरणों में 7 दिनों और गैर-आवासीय प्रकरणों में 15 दिनों के भीतर संबंधित विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करने और मानचित्र स्वीकृति की समय सीमा तय की गई है। लेकिन इन प्रावधानों का पालन प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जटिलताओं के कारण नहीं हो पा रहा है।
2. EASEAPP पोर्टल का सही उपयोग
ऑनलाइन माध्यम से मानचित्र जमा करने और विभागों से अनापत्ति प्राप्त करने के लिए एक स्वचालित प्रणाली की मांग की गई है। ARCED ने सुझाव दिया कि यदि विभाग तय समय में NOC जारी नहीं करते हैं, तो “डिम्ड अनापत्ति” मानकर पत्रावली का निपटारा किया जाए।
3. भू-आच्छादन और FAR में वृद्धि की जरूरत
संगठन ने मौजूदा फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) को बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। उनका कहना है कि मौजूदा नियमों के तहत भवन निर्माण में ऊंचाई और भू-आच्छादन की सीमाएं व्यावहारिक नहीं हैं। भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए FAR को न्यूनतम 5 गुना तक बढ़ाने की मांग की गई है।
4. पार्किंग और रैंप नियमों में सुधार
पार्किंग से जुड़े नियमों को सरल बनाने और छोटे भूखंडों के मालिकों को भी व्यावसायिक निर्माण की अनुमति देने की बात कही गई है। इसके अलावा, रैंप के ढाल और चौड़ाई को व्यवहारिक बनाने की भी मांग की गई है।
5. पर्वतीय क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान
ARCED ने पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विशेष नियम बनाने का सुझाव दिया है। वर्तमान नियम, जैसे रिटेनिंग वॉल से 1.20 मीटर का “ओपन टू स्काई” क्षेत्र रखना, व्यवहारिक नहीं है। यह प्रावधान भवन की चौड़ाई को कम कर देता है और अधिक कटाई का कारण बनता है। संगठन ने इन नियमों को खत्म करने की अपील की है।
6. भीमताल महायोजना का अद्यतन
भीमताल महायोजना (1995-2011) के हरित क्षेत्र प्रावधानों को अद्यतन करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। संगठन ने कहा कि इस क्षेत्र में राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज आबादी वाले भूखंडों पर भी मानचित्र स्वीकृति नहीं हो पा रही है, जिससे स्थानीय निवासियों को आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार और प्रशासन को सुझाव
ARCED ने मुख्यमंत्री, शहरी विकास मंत्री, मुख्य सचिव, और जिलाधिकारी सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन की प्रतिलिपि भेजते हुए इन समस्याओं के समाधान की अपील की है।
1. भवन निर्माण नियमों को व्यवहारिक बनाया जाए।
2. ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देकर प्रक्रियाओं को पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए।
3. पर्वतीय क्षेत्रों के लिए अलग नियमों का निर्धारण किया जाए।
4. भीमताल जैसे क्षेत्रों में पुराने प्रावधानों को अद्यतन किया जाए।
भविष्य की दिशा
ARCED ने अपने ज्ञापन में भवन निर्माण उपविधियों को व्यवहारिक बनाने की बात कहते हुए इस दिशा में ठोस कदम उठाने की अपील की है। यदि इन बिंदुओं पर कार्यवाही की जाती है, तो यह न केवल जनहित में होगा, बल्कि उत्तराखंड के शहरी और ग्रामीण विकास को नई दिशा देगा।
निष्कर्ष
भवन निर्माण और विकास से जुड़े नियमों का सरलीकरण न केवल आम जनता के लिए सहूलियत प्रदान करेगा, बल्कि राज्य के आर्थिक और पर्यावरणीय विकास को भी बढ़ावा देगा। ARCED का यह कदम जनहित और प्रदेश हित में एक महत्वपूर्ण प्रयास है, जिसे प्रशासन की गंभीरता और दूरदृष्टि की आवश्यकता है।
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